भगवान शिव की स्तुति और अभिषेक करने के बहुत सारे पूजा और विधान हैं, परंतु रुद्री के द्वरा हम शिव अभिषेक कर के हम भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते है. और रुद्री के पाठ के द्वारा अपनी हर प्रेसानी और चिंता से मुक्ति भी पा सकते है.
रुद्री के पाठ में कुल 176 श्लोका हैं जिस में प्रथम आध्याय में 10 श्लोका हैं , दिवित्या आध्याय में 22 श्लोका हैं, तृतीय आध्याय में 17 श्लोका हैं,
चतुर्थ आध्याय में 17 श्लोका हैं, पंचम आध्याय में 66 श्लोका ह, स्सतम आध्याय में 8 श्लोका ह, सप्तम आध्याय में 7 श्लोका हैं, असटम आध्याय में 29 श्लोका हैं, इस प्रकार कुल 17 6 श्लोक हैं .
इसके अलावा शांति मंत्र के 24 श्लोक हैं ,और स्वस्ति मंत्र के 14 श्लोक हैं .
इनका प्रयोग ग्रह शांति और धन, और सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है .
अगर मनुष्य 40 दिनों तक अगर लगातार रूद्र अभिषेक करता है तो भगवन शिव की किरपा से सभी सुख और समृधि प्राप्त कर लेता हैं .
रुद्री के पाठ में कुल 176 श्लोका हैं जिस में प्रथम आध्याय में 10 श्लोका हैं , दिवित्या आध्याय में 22 श्लोका हैं, तृतीय आध्याय में 17 श्लोका हैं,
चतुर्थ आध्याय में 17 श्लोका हैं, पंचम आध्याय में 66 श्लोका ह, स्सतम आध्याय में 8 श्लोका ह, सप्तम आध्याय में 7 श्लोका हैं, असटम आध्याय में 29 श्लोका हैं, इस प्रकार कुल 17 6 श्लोक हैं .
इसके अलावा शांति मंत्र के 24 श्लोक हैं ,और स्वस्ति मंत्र के 14 श्लोक हैं .
इनका प्रयोग ग्रह शांति और धन, और सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है .
अगर मनुष्य 40 दिनों तक अगर लगातार रूद्र अभिषेक करता है तो भगवन शिव की किरपा से सभी सुख और समृधि प्राप्त कर लेता हैं .
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